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सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय की वर्ष 2021 के दौरान प्रमुख पहलें और उपलब्धियां

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सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय की वर्ष 2021 के दौरान प्रमुख पहलें और उपलब्धियां

1. नशा मुक्त भारत अभियान

मादक पदार्थों के दुरुपयोग के मुद्दे से निपटने और भारत को नशा मुक्त बनाने के लिए देश में नशीले पदार्थों के उपयोग के मामले में सबसे संवेदनशील रूप से पहचान किए गए 272 जिलों में 15 अगस्त, 2020 को नशा मुक्त भारत अभियान (एनएमबीए) की शुरुआत की गई थी। इन संवेदनशील जिलों की पहचान व्यापक राष्ट्रीय सर्वेक्षण के निष्कर्षों और नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी के आधार पर की गई थी।

 यह अभियान नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो द्वारा नशीले पदार्थों की आपूर्ति पर लगाए गए अंकुशसामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय द्वारा पहुंच और जागरूकता तथा मांग में कमी लाने के प्रयास एवं स्वास्थ्य विभाग के माध्यम से उपचार को शामिल करते हुए एक तीन-आयामी हमला है।

 युवाओंशैक्षणिक संस्थानोंमहिलाओंबच्चों और नागरिक समाज संगठनों/गैर सरकारी संगठनों (एनजीओ) की प्रमुख लक्षित आबादी और नशा मुक्ति अभियान के हितधारकों के रूप में परिकल्पना की गई है।

 नशा मुक्त भारत अभियान 15 अगस्त, 2020 को पहचान किए गए 272 जिलों में शुरू किया गया था। इसकी शुरुआत से ही पूरे देश में अनेक प्रकार की गतिविधियों का आयोजन किया गया हैजिनमें समाज के सभी वर्गों और हितधारकों की भागीदारी को बढ़ावा दिया गया है। जिला कलेक्टर/मजिस्ट्रेट की अध्यक्षता में जिला स्तर नशा मुक्त समितियों ने योजना बनाकर अपने-अपने जिलों में इस अभियान के कार्यान्वयन में अग्रणी भूमिका निभाई है।

  • इस अभियान के लिए की गई विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से अब तक इन पहचान किए जिलों में 1.4 करोड़ से अधिक लोगों के साथ संपर्क किया गया है।
  • इस अभियान की गतिविधियों में 45 लाख से अधिक युवाओं ने सक्रिय रूप से भाग लिया है।
  • आंगनवाड़ी और आशा कार्यकर्ताओंएएनएममहिला मंडलों और महिला स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से एक बड़े समुदाय तक पहुंचने में 29.5 लाख से अधिक महिलाओं का महत्वपूर्ण योगदान रहा है।
  • पूरे देश में अब तक 30 लाख से अधिक छात्र स्कूलों और कॉलेजों जैसे 55,000 से अधिक शैक्षणिक संस्थानों में आयोजित कार्यक्रमोंप्रतियोगिताओं और सत्रों में शामिल हुए हैं।
  • इन पहचान किए गए 272 जिलों में इस अभियान की गतिविधियों का नेतृत्व करने के लिए मास्टर स्वयंसेवकों का चयन करके उन्हें प्रशिक्षण दिया गया है। 8,000 से अधिक मास्टर वालंटियर्स का मजबूत नेटवर्क इस अभियान में सक्रिय रूप से भाग ले रहा है।
  • मंत्रालय ने अनेक गतिविधियों और ऑनलाइन कार्यक्रमों के माध्यम से ऑनलाइन स्पेस प्राप्त करने और विभिन्न हितधारकों के साथ जुड़ने का प्रयास किया है। ट्विटरफेसबुक और इंस्टाग्राम पर अभियान के सोशल मीडिया अकाउंट्स ने ऑनलाइन उपस्थिति के लिए प्रभावी माध्यम के रूप में काम किया है।
  • मंत्रालय के साथ-साथ राज्यों और जिलों के उच्च अधिकारियोंविभिन्न क्षेत्रों के विषयवस्तु मुद्दों और क्षेत्र विशेषज्ञों, मादक पदार्थों के क्षेत्र में काम कर रहे पेशेवरों और बड़े पैमाने पर युवाओं की भागीदारी के साथ डीसी/डीएम के साथ पैनल चर्चाओं और ऑनलाइन प्रतियोगिताओं जैसे ऑनलाइन कार्यक्रम भी आयोजित किए गए हैं।
  • मंत्रालय द्वारा नशा मुक्त भारत अभियान के लिए एक मोबाइल एप्लिकेशन लॉन्च किया गया थाजिसे वास्तविक रूप से हो रही गतिविधियों की जानकारी देने और डेटा उपलब्ध करने के लिए शुरू किया गया था। इस ऐप का उपयोग चयन किए गए उन  वालंटियर्स द्वारा किया जा रहा है जो अभियान के साथ-साथ जिले के अधिकारियों द्वारा आयोजित की जाने वाली गतिविधियों और उनके संचालन में शामिल हैं। सभी एकत्रित डेटा को एनएमबीए डैशबोर्ड में प्रस्तुत किया जाता है, जहां यह विस्तृत जानकारी जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर देखी जा सकती है।
  • एनएमबीए के लिए एक वेबसाइट (http://nmba.dosje.gov.in) को इस अभियान के बारे में उपयोगकर्ता/दर्शक को विस्तृत जानकारी और पूरा ज्ञान प्रदान करने के उद्देश्य से लाइव और सार्वजनिक किया गया है।
  • एनएमबीए वेबसाइट में मादक पदार्थों के दुरुपयोग से संबंधित किसी प्रश्न के बारे में फोरम और चर्चा के लिए एक इंटरैक्टिव स्पेस भी है। 24 घंटे के भीतर विषयवस्तु और क्षेत्र के विशेषज्ञों द्वारा प्रश्नों का उत्तर दिया जाता है। ये विशेषज्ञ निम्हांस और पीजीआई एमईआर जैसे प्रसिद्ध संस्थानों से जुड़े हैं।
  • मंत्रालय द्वारा उपलब्ध कराई जा रही सभी पुनर्वासउपचार और परामर्श सुविधाओं को जियो-टैग किया गया है।
  • इस अभियान और उसके उद्देश्यों और जिलों के प्रयासों के बारे में एक लघु फिल्म बनाई गई है।
  • क्राइस्ट यूनिवर्सिटी, मणिपाल एकेडमी ऑफ हायर एजुकेशनवीआईटी जैसे देश के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय और कॉलेज अपने परिसरों और उनके आसपास मौजूद संवेदनशील समुदायों में इस अभियान के कार्यान्वयन में सक्रिय रूप से शामिल हैं।
  • आजादी का अमृत महोत्सव मनाने के लिएमंत्रालय ने परिभाषित मानकों के अनुसार अगस्त 2021 से अगस्त 2022 तक 100 जिलों को 'नशीली दवा के संवेदनशील जिलेघोषित करने की योजना बनाई है।

 

2. आजीविका और उद्यम के लिए हाशिए पर रहने वाले व्यक्तियों के लिए स्माइल’ योजना

सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने एक प्रमुख योजना ‘स्माइल-सपोर्ट फॉर मार्जिनेलाइज्ड इंडिविजुअल फॉर लाइव्लीहुड एंड इंटरप्राइज’ योजना तैयार की है, जिसमें दो उप योजनाएं- 'ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के कल्याण के लिए व्यापक पुनर्वास हेतु केंद्रीय क्षेत्र योजना' और दूसरी भीख मांगने के कार्य में लगे व्यक्तियों के व्यापक पुनर्वास के लिए' केंद्रीय क्षेत्र योजना शामिल हैं। इस अम्ब्रेला योजना में कई व्यापक उपाय शामिल हैं, जिनमें ट्रांसजेंडर व्यक्तियों और भीख मांगने के काम में लगे व्यक्तियों के लिए कल्याण उपायों सहित अनेक व्यापक उपाय शामिल हैं, जिनमें राज्य सरकारों/केंद्र शासित प्रदेशों, स्थानीय शहरी निकायों, स्वैच्छिक संगठनों, समुदाय आधारित संगठनों (सीबीओ) और अन्य संस्थानों की सहायता से पुनर्वास, चिकित्सा सुविधाओं, परामर्श, शिक्षा, कौशल विकास और आर्थिक संबंधों के बारे में व्यापक रूप से ध्यान केंद्रित किया गया है। इस योजना के जल्दी ही शुरू होने की उम्मीद है। 

 3. अनुसूचित जाति (एससी) छात्रों के लिए पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना

एससी छात्रों के लिए पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना के तहत केंद्रीय कैबिनेट ने दिसंबर, 2020 में 2020-21 से 2025-26 की अवधि के लिए योजना में परिवर्तनकारी बदलावों को मंजूरी दी थी। इनमें केंद्र और राज्यों के बीच 60:40 की तय साझेदारी ढांचा और 2021-22 के बाद लाभार्थियों को केंद्रीय शेयर का डीबीटी शामिल है। मार्च, 2021 के दौरान संशोधित योजना के कार्यान्वयन को लेकर समय कम होने के बावजूद योजना के तहत आवंटन की उपलब्धि असाधारण थी और यह आवंटित बजट के 105 प्रतिशत से अधिक थी। 62 लाख से अधिक लाभार्थियों (अब तक राज्यों ने सटीक आंकड़े उपलब्ध नहीं करवाए हैं) को कवर करते हुए 4008.60 करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता जारी की गई।

वित्तीय वर्ष 2021-22 से लाभार्थियों के बैंक खाते में प्रत्यक्ष केंद्रीय हिस्सा प्रदान किए जाने की बड़ी पहल को विभाग सफलतापूर्वक लागू कर रहा है। इसके तहत 6 दिसंबर, 2021 तक 4 लाख से अधिक लाभार्थियों के लिए कुल 245.42 करोड़ रुपये की राशि जारी की जा चुकी है।

4. एनएसकेएफडीसी की उपलब्धियां

  1. एनएसकेडीएससी की ऋण योजना की उपलब्धियां
  • नेशनल सफाई कर्मचारी फाइनेंस एंड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (एनएसकेएफडीसी) ने कैलेंडर वर्ष 2021 के दौरान 21.12.21 तक एनएसकेएफडीसी की विभिन्न ऋण योजनाओं का लाभ 21,869 लाभार्थियों तक पहुंचाने के लिए अपनी चैनलाइजिंग एजेंसियों को 99.33 करोड़ रुपये का वितरण किया है।
  • मशीनीकृत सफाई को बढ़ावा देने और लक्षित समूह को आजीविका के अवसर प्रदान करने के उद्देश्य से, एनएसकेएफडीसी अपनी स्वच्छता उद्यमी योजना (एसयूवाई) के तहत मशीनीकृत सफाई उपकरणों की खरीद के लिए वित्तीय सहायता भी प्रदान कर रहा है। लक्षित समूह के लाभार्थियों को शहरी स्थानीय निकायों से मशीनीकृत सफाई के लिए दीर्घकालिक ठेका प्रदान किया जाता है और एसयूवाई योजना के अंतर्गत संबंधित उपकरणों/वाहनों को एसआरएमएस योजना के तहत पूंजी व ब्याज सब्सिडी के प्रावधान के साथ राशि प्रदान की जाती है।
  • सफाई मित्र सुरक्षा चैलेंज के तहत विभिन्न शहरों में 28 ऋण मेलों का आयोजन किया गया। इसका उद्देश्य एनएसकेएफडीसी की स्वच्छता उद्यमी योजना (एसयूवाई) के तहत मशीनीकृत सफाई उपकरणों/वाहनों की खरीद के लिए एनएसकेएफडीसी के लक्षित समूह को वित्तीय सहायता प्रदान करना था।
  • एनएसकेएफडीसी ने अपने लक्षित समूह के 142 लाभार्थियों के लिए कुल 13.73 करोड़ रुपये की लागत वाले मशीनीकृत सफाई उपकरणों की 117 इकाइयों की खरीद के लिए 5.19 करोड़ रुपये की पूंजीगत सब्सिडी भी प्रदान की है।
  1. स्वच्छता उद्यमी योजना (एसयूवाई)

नेशनल सफाई कर्मचारी फाइनेंस एंड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (एनएसकेएफडीसी) ने 2 अक्टूबर, 2014 को महात्मा गांधी की जयंती के अवसर पर स्वच्छता उद्यमी योजना (एसयूवाई) की शुरुआत की थी। इस योजना को स्वच्छता और सफाई कर्मचारियों व उनके आश्रितों को आजीविका प्रदान करने व मैनुअल स्कैवेंजर्स से मुक्त करने के दोहरे उद्देश्य को साथ शुरू किया गया है। एनएसकेएफडीसी स्वच्छता संबंधी मशीनीकृत उपकरणों के संचालन और वाहनों की खरीद के लिए अपने लक्षित समूह को वित्तीय सहायता प्रदान करता है।

ए. एनएसकेएफडीसी की स्वच्छता उद्यमी योजना (एसयूवाई) के तहत शहरी स्थानीय निकायों (यूएलबी) को वित्तीय सहायता: एनएसकेएफडीसी की एसयूवाई योजना के तहत शहरी स्थानीय निकायों (यूएलबी) को किसी भी मशीनीकृत सफाई उपकरण/वाहन की खरीद के लिए ऋण प्रदान किया जाता है, जिसकी इकाई लागत 50.00 लाख रुपये से अधिक नहीं है। इसका विवरण निम्नलिखित है:

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