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मालदीव और लक्षद्वीप भारत के लिए इतने अहम क्यों हैं?

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मालदीव और लक्षद्वीप भारत के लिए इतने अहम क्यों हैं?

भारत के केंद्र शासित प्रदेश लक्षद्वीप से मालदीव क़रीब 700 किलोमीटर दूर है और भारत के मुख्य भूभाग से 1200 किलोमीटर दूर. वहीं लक्षद्वीप भारत के मेनलैंड से 496 किलोमीटर दूर है. लक्षद्वीप 36 छोटे-छोटे द्वीपों का समूह है जबकि मालदीव एक हज़ार से ज़्यादा द्वीपों का समूह है.

लक्षद्वीप में प्रफुल पटेल को प्रशासक बनाने के बाद से कई विवाद सामने आ चुके हैं तो मालदीव में वहाँ के पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन के कारण इंडिया आउट कैंपेन ज़ोरों पर है.

दिसंबर 2020 में पटेल को लक्षद्वीप के प्रशासन की ज़िम्मेदारी दी गई थी. तब से ऐसे कई फ़ैसले लिए गए हैं जिन्हें लेकर ख़ासा विवाद हो चुका है. पटेल गोमांस और बीफ़ पर पाबंदी लगा चुके हैं.

पिछले हफ़्ते ही लक्षद्वीप में 17 दिसंबर को साप्ताहिक छुट्टी शुक्रवार के बदले रविवार कर दी गई. लक्षद्वीप में दशकों से शुक्रवार को जुमे की नमाज़ के लिए छुट्टी रहती थी. 2011 की जनगणना के अनुसार, यहाँ की 96 फ़ीसदी आबादी मुसलमानों की है.

लक्षद्वीप से राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के सांसद मोहम्मद फ़ैज़ल पीपी ने इस फ़ैसले का विरोध किया है और इसे एकतरफ़ा बताया है.

 उन्होंने कहा है कि प्रफुल पटेल चुने हुए प्रतिनिधि से बिना परामर्श किए एकतरफ़ा फ़ैसले ले रहे हैं. अब यहां स्कूलों का टाइम भी दिन में 10 से शाम पाँच बजे तक कर दिया गया है.

लक्षद्वीप और मालदीव दोनों को भारत की सुरक्षा के लिहाज के काफ़ी अहम माना जाता है. अगर मालदीव में भारत की मौजूदगी कमज़ोर होती है तो चीन बहुत पास आ जाएगा और लक्षद्वीप में सुरक्षा को लेकर कोई चूक होती है तो चरमपंथियों की घुसपैठ की आशंका गहरा जाएगी.

कहा जाता है कि 26 नवंबर, 2008 को मुंबई में चरमपंथी हमले से लक्षद्वीप की रणनीतिक संवेदनशीलता को समझा जा सकता है. केरल के तटों की सुरक्षा के लिहाज से भी लक्षद्वीप को काफ़ी अहम माना जाता है. लक्षद्वीप की संवेदनशीलता को देखते हुए ही आईसीजी पोस्ट को सक्रिय किया गया है. इसके अलावा आईएनएस द्वीपरक्षक नेवल बेस भी बनाया गया है.

 

मालदीव में भारत का विरोध

कहा जा रहा है कि मालदीव में सरकार 'इंडिया फ़र्स्ट' की नीति पर चल रही है तो वहां का विपक्ष 'इंडिया आउट' कैंपेन चला रहा है. 30 नवंबर को मालदीव के सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन को रिहा किया तो भारत विरोधी अभियान में और तेज़ी आई.

भारत पूरे घटनाक्रम को देख रहा है लेकिन कोई समाधान नज़र नहीं आ रहा है कि मालदीव के भीतर भारत विरोधी अभियान को कैसे रोका जाए. भारत के लिए हिन्द महासागर में मालदीव सामरिक रूप से बहुत अहम है लेकिन वहाँ भी चीन की मौजूदगी काफ़ी मज़बूत है.

अब्दुला यामीन जब तक जेल में थे तब तक भारत विरोधी 'इंडिया आउट' कैंपेन काबू में था लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें सारे आरोपों से बरी कर रिहा किया तो इस अभियान को नई ऊर्जा मिली है.

 

अब्दुल्ला यामीन जब तक राष्ट्रपति रहे तब तक उन पर चीनी हितों के लिए काम करने का आरोप लगता रहा. यामीन ने अपने कार्यकाल में सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को भी जेल में डाल दिया था. कहा जाता है कि यामीन ने मालदीव में सुन्नी कट्टरता को बढ़ावा दिया है.

2018 में जब अब्दुल्ला यामीन की इब्राहिम मोहम्मद सोलिह से हार हुई तो भारत के लिए राहत की तरह देखा गया. यामीन जब तक जेल में थे तब तक इंडिया आउट कैंपेन सोशल मीडिया तक सीमित था लेकिन अब लोग सड़कों पर भी उतर रहे हैं.

इंडिया आउट कैंपेन चलाने वाले इब्राहिम सोलिह पर भारत परस्त होने का आरोप लगाते हैं.

इंडिया आउट कैंपेन का मालदीव के भीतर विरोध भी हो रहा है. मालदीव की अन्य राजनीतिक पार्टियों का कहना है कि यामीन भारत को लेकर मालदीव में नफ़रत फैला रहे हैं. कहा जा रहा है कि यामीन सत्ता में लौटने के लिए भारत विरोधी कैंपेन चला रहे हैं.

 

मालदीव की राजधानी माले का सीनामाले पुल जिसके बनने से पहले एयरपोर्ट तक स्पीड बोट के ज़रिए पहुंचा जाता था

मालदीव की सरकार चिंतित

यामीन के 'इंडिया आउट' कैंपेन को लेकर वहाँ की सरकार ने 19 दिसंबर को एक बयान जारी किया था और कहा था कि भारत के ख़िलाफ़ छोटे समूह और कुछ नेता झूठ के आधार पर नफ़रत फैलाने की कोशिश कर रहे हैं.

मालदीव के विदेश मंत्रालय की ओर से जारी बयान में इसे चिंताजनक बताया गया था. इब्राहिम सोलिह की गठबंधन सरकार में शामिल लगभग सभी पार्टियों ने यामीन के इंडिया 'आउट कैंपेन' को ख़ारिज कर दिया है.

2008 में मालदीव ने बहुदलीय लोकतांत्रिक व्यवस्था को अपनाया था. लेकिन 2016 और 17 में मालदीव के तत्कालीन राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन ने कई ऐसे क़ानून बनाए जिनसे मौलिक अधिकारों और संस्थाओं की स्वायतत्ता को झटका लगा था.

प्रधानमंत्री मोदी ने यामीन के कार्यकाल में ही मालदीव का अपना प्रस्तावित दौरा रद्द कर दिया था. 2016 में 10 और 11 अप्रैल को अब्दुल्ला यामीन भारत के दो दिवसीय दौरे पर पहुँचे थे.

इसी दौरे में भारत ने मालदीव के साथ सुरक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किया था. तब अब्दुल्ला ने भारत को आश्वस्त करने की कोशिश की थी कि उनकी विदेश नीति में 'इंडिया फ़र्स्ट' प्रमुखता से रहेगा. चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ मालदीव के पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन

 

 

भारतीय कंपनी को किया बाहर

लेकिन अब्दुल्ला यामीन से पहले ही भारत का रिश्ता मालदीव से ख़राब हो चुका था. 2012 में मोहम्मद वहीद ने भारतीय कंपनी जीएमआर से 51.1 करोड़ डॉलर की लागत से विकसित होने वाले माले अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे की डील को रद्द कर दिया था.

उन्होंने यह भी आरोप लगाया था कि भारत मालदीव के आंतरिक मामलों में दख़ल दे रहा है. ऐसा तब है जब मोहम्मद वहीद की सरकार को मनमोहन सिंह ने ही मान्यता दी थी.

भारत के लिए सबसे ज़्यादा चिंताजनक बात यह रही कि पाकिस्तानी सेना की तरफ़ से घोषणा की गई थी कि पाकिस्तानी युद्धपोत मालदीव के एक्सक्लूसिव इकनॉमिक ज़ोन की देखरेख करेंगे.

25 अक्टूबर 2016 को सिंगापुर आर्बिट्रेशन ट्राइब्यूनल ने मालदीव की सरकार को क़रीब 25 करोड़ डॉलर मुआवज़े के रूप में भारतीय कंपनी जीएमआर को देने का फ़ैसला दिया था.

यह फ़ैसला माले एयरपोर्ट को लेकर जीएमआर के साथ हुए समझौते को रद्द करने के मामले में था. भारतीय कंपनी से डील रद्द करने के बाद मालदीव ने इसे चीनी कंपनी बीजिंग अर्बन कंस्ट्रक्शन ग्रुप को दे दिया था. 2016 में मालदीव ने चीनी कंपनी को एक द्वीप 50 सालों की लीज महज 40 लाख डॉलर में दे दिया था.

1965 में जब मालदीव आज़ाद हुआ तो भारत उन देशों में एक था जिन्होंने उसे तत्काल मान्यता दी थी. 1978 से 2008 तक सत्ता में रहे राष्ट्रपति अब्दुल गयूम के साथ भारत के रिश्ते बहुत अच्छे रहे.

1988 में भारत ने सैन्य हस्तक्षेप कर तख़्तापलट को रोक लिया था. भारत प्राकृतिक आपदा में भी मालदीव में मदद पहुँचाने वाले देशों में सबसे आगे रहा है. 2008 में जब मालदीव में लोकतंत्र आया तब भारत ने गयूम के उत्ताराधिकारी मोहम्मद नशीद का समर्थन किया.

 

भारत की मदद

पिछले साल सितंबर में कोविड -19 महामारी के कारण अर्थव्यवस्था पर पड़े प्रभाव से निपटने के लिए भारत ने मालदीव को 25 करोड़ डॉलर की वित्तीय सहायता दी थी. मालदीव के राष्ट्रपति इब्राहिम मोहम्मद सोलिह ने कोरोना के कारण पैदा हए आर्थिक संकट से निपटने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मदद के लिए आग्रह किया था.

सहायता के लिए भारत का शुक्रिया अदा करते हुए राष्ट्रपति सोलिह ने ट्विटर पर लिखा था, "जब भी मालदीव को एक दोस्त की मदद की ज़रूरत होती है, भारत ऐसे मौकों पर सामने आता है. पीएम मोदी, सरकार और भारत के लोगों का तहे दिल से शुक्रिया, उन्होंने आज 25 करोड़ डॉलर की मदद कर पड़ोसी होने की भावना और उदारता दिखाई है."

मालदीव के राजस्व का एक तिहाई हिस्सा पर्यटन से आता है. इसलिए कोविड -19 के कारण वहां की अर्थव्यवस्था पर बहुत बुरा असर पड़ा है. अनुमान है कि अगर महामारी के कारण 700 करोड़ डॉलर का नुक़सान झेलना पड़ा है, तो इसमें एक तिहाई हिस्सा पर्यटन की वजह से है.

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